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चीन से 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान ले रहा पाकिस्तान, IAF चीफ एपी सिंह बोले- भारत हर चुनौती से निपटने में सक्षम

नई दिल्ली: पाकिस्तान द्वारा चीन से पांचवीं पीढ़ी (5th-Generation) के लड़ाकू विमान हासिल करने की खबरों के बीच भारतीय वायुसेना (IAF) प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने देश को आश्वस्त किया है। वायुसेना दिवस (8 अक्टूबर) से पहले आयोजित वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के पास इस तरह की किसी भी चुनौती से निपटने की पूरी क्षमता मौजूद है।

‘यह चिंता का विषय है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं’

आईएएफ चीफ एपी सिंह ने कहा कि पाकिस्तान का चीन से उन्नत लड़ाकू विमान लेना और वहां अपने पायलटों को ट्रेनिंग दिलाना निश्चित रूप से चिंता का विषय है, लेकिन यह कोई ऐसी स्थिति नहीं है जिसका समाधान न हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी युद्ध या हवाई अभियान के परिणाम केवल एक उन्नत विमान के होने से तय नहीं होते, बल्कि इस बात पर निर्भर करते हैं कि उस तकनीक को पूरे सैन्य सिस्टम के साथ कैसे एकीकृत (integrate) किया जाता है।

AMCA प्रोग्राम में तेजी लाने पर जोर

एयर चीफ मार्शल ने भारत के स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट- एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम को जल्द से जल्द पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हमें इस पीढ़ी के विमानों को जल्द वायुसेना में शामिल करने को प्राथमिकता देनी होगी। यदि इस प्रोग्राम में कोई देरी होती है, तो वायुसेना को अन्य विकल्पों (5th जनरेशन एयरक्राफ्ट कहीं और से लेना) पर भी विचार करना पड़ सकता है।

मुख्य बिंदु:

  • पाकिस्तान की तैयारी: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान चीन से J-35 स्टील्थ फाइटर जेट हासिल करने की कोशिश कर रहा है और उसके पायलट चीन में ट्रेनिंग ले रहे हैं।
  • भारत की ताकत: वायुसेना प्रमुख ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भी पाकिस्तान के पास अन्य आधुनिक प्लेटफॉर्म रहे हैं, लेकिन वे अपने मकसद में कुछ खास हासिल नहीं कर पाए।
  • आगामी रणनीति: भारतीय वायुसेना स्वदेशी हथियारों, ड्रोन और आधुनिक तकनीक के सटीक तालमेल से अपनी युद्धक क्षमता को लगातार मजबूत कर रही है, ताकि किसी भी संभावित खतरे का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।

राजेश कुमार

उत्तर भारत के एक छोटे शहर में पले-बढ़े। बचपन से ही लोगों की बातें सुनना और आसपास की ज़िंदगी को ध्यान से देखना उनकी आदत रही है। परिवार में सादगी और मेहनत को हमेशा महत्व दिया गया। खाली समय में किताबें पढ़ना, पुरानी डायरियाँ पलटना और सड़क किनारे चाय की दुकान पर बैठकर आम लोगों से बात करना उन्हें अच्छा लगता है। वे मानते हैं कि हर इंसान की अपनी एक कहानी होती है, बस उसे सुनने वाला कोई होना चाहिए।

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