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कांग्रेस ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान की रूपरेखा तय की, 10 अक्टूबर से देशव्यापी कार्यक्रम

नई दिल्ली: कांग्रेस ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ नाम से देशव्यापी अभियान की रूपरेखा तैयार कर ली है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में सोमवार को इंदिरा भवन में हुई बैठक के बाद यह घोषणा की गई। बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, महासचिव के. सी. वेणुगोपाल, जयराम रमेश, राज्यों के प्रभारी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष शामिल हुए।

कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष ने प्रदेश अध्यक्षों, प्रभारियों और महासचिवों को कथित वोट चोरी के खिलाफ आक्रामक देशव्यापी अभियान चलाने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पद पर हैं और चुनावी व्यवस्था में पार्टी के अनुसार सुधार नहीं हो जाता। पार्टी ने चुनाव आयोग पर एसआईआर प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

अभियान के चरण

पार्टी ने कार्यक्रम को कई चरणों में बांटा है। इंडिया गठबंधन के सहयोग से 2 से 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च और प्रदर्शन पहले से चल रहे हैं। कांग्रेस के मुताबिक 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसद संसद के मकर द्वार से चुनाव आयोग कार्यालय तक शांतिपूर्ण मार्च करेंगे।

10 से 20 अक्टूबर तक ब्लॉक स्तर पर बाइक रैली, साइकिल रैली और पदयात्रा निकाली जाएंगी। इन कार्यक्रमों के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त के पुतले जलाए जाने और सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट कार्यालयों तक मार्च पहुंचने की बात कही गई है।

25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक गांव स्तर पर चौपालें आयोजित की जाएंगी। इस दौरान ‘वोट रक्षक’ कहे जाने वाले कार्यकर्ता उन लोगों के घर-घर पहुंचेंगे, जिनके नाम एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटाए जाने का दावा किया गया है। कांग्रेस का कहना है कि इन नामों को सूची में वापस शामिल कराने का प्रयास किया जाएगा।

1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की रैली प्रस्तावित है। 25 और 26 नवंबर को दिल्ली के आसपास के इलाकों से छह यात्राएं निकाली जाएंगी, जो राष्ट्रीय राजधानी में समाप्त होंगी।

13.3 करोड़ नामों का दावा

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि देशभर में करीब 10 लाख बूथ हैं और एसआईआर के दौरान करीब 13.3 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं। पार्टी का दावा है कि ये आंकड़े अभी तक आंकड़े भर हैं और अभियान के जरिए इन मतदाताओं की पहचान कर उन्हें सूची में वापस लाने की कोशिश की जाएगी। कुछ बयानों में यह संख्या करीब 13.5 करोड़ बताई गई है।

चुनाव आयोग ने इस आंकड़े पर अपनी सफाई दी है। आयोग के अनुसार यह संख्या ड्राफ्ट चरण में अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृतक या डुप्लिकेट बताए गए मतदाताओं से जुड़ी है और इसे अंतिम रूप से हटाए गए नाम नहीं माना जा सकता। आयोग का कहना है कि छूटे हुए मतदाताओं को दोबारा शामिल करने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं और एसआईआर से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

यह अभियान कांग्रेस कार्यसमिति और इंडिया गठबंधन की पिछली बैठकों में लिए गए फैसलों का अगला चरण है। सितंबर के अंत में कांग्रेस कार्यसमिति ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, एसआईआर पर रोक और हटाए गए नाम बहाल करने की मांग करते हुए प्रस्ताव पारित किया था। विपक्ष एसआईआर को चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप बता रहा है, जबकि चुनाव आयोग और सत्ताधारी दल इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं।

राजेश कुमार

उत्तर भारत के एक छोटे शहर में पले-बढ़े। बचपन से ही लोगों की बातें सुनना और आसपास की ज़िंदगी को ध्यान से देखना उनकी आदत रही है। परिवार में सादगी और मेहनत को हमेशा महत्व दिया गया। खाली समय में किताबें पढ़ना, पुरानी डायरियाँ पलटना और सड़क किनारे चाय की दुकान पर बैठकर आम लोगों से बात करना उन्हें अच्छा लगता है। वे मानते हैं कि हर इंसान की अपनी एक कहानी होती है, बस उसे सुनने वाला कोई होना चाहिए।

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