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दफ्तर आने-जाने पर कर्मचारी हर महीने औसतन ₹785 खर्च करते हैं: एनएसओ का पहला घरेलू यात्रा सर्वे

नई दिल्ली: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के पहले राष्ट्रीय घरेलू यात्रा सर्वेक्षण (एनएचटीएस) के अनुसार, तय कार्यस्थल तक आने-जाने पर कर्मचारी औसतन ₹785 प्रति माह खर्च करते हैं। यह सर्वे सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के तहत जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच किया गया। इसके प्रमुख संकेतक और निष्कर्ष 5 अक्टूबर 2026 को फैक्टशीट के रूप में जारी किए गए।

सर्वे में एक किलोमीटर से अधिक की दूरी वाली यात्रा को दर्ज किया गया है। शहरी क्षेत्रों में तय कार्यस्थल तक आने-जाने का औसत मासिक खर्च ₹1,044 है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह ₹612 है। पुरुष कर्मचारी औसतन ₹835 प्रति माह खर्च करते हैं, जबकि महिला कर्मचारियों का औसत खर्च ₹533 है।

कर्मचारी कैसे पहुँचते हैं काम पर

तय कार्यस्थल तक आने-जाने में दोपहिया वाहन सबसे आम साधन है। सर्वे के अनुसार, 42.6 प्रतिशत कर्मचारी दोपहिया का उपयोग करते हैं। पैदल चलना दूसरे स्थान पर है, जिसकी हिस्सेदारी 28.3 प्रतिशत है। सार्वजनिक परिवहन का उपयोग अपेक्षाकृत कम है। शहरी इलाकों में मोनोरेल, मेट्रो, उपनगरीय रेल और ट्राम मिलकर लगभग 5 प्रतिशत शहरी कर्मचारियों की यात्रा में हिस्सेदार हैं। इनका उपयोग महाराष्ट्र में 20.7 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 16.5 प्रतिशत और दिल्ली में 14.4 प्रतिशत दर्ज हुआ।

15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के कर्मचारियों में से 57.6 प्रतिशत एक किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर काम पर जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात 54.5 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 64.1 प्रतिशत है। तय कार्यस्थल तक पहुँचने वाले 83.4 प्रतिशत कर्मचारी 30 मिनट से कम समय में पहुँच जाते हैं। तय कार्यस्थल तक औसत यात्रा समय लगभग 25 मिनट है।

पुरुष और महिला कर्मचारियों के बीच यात्रा की भागीदारी में भी अंतर है। 61.9 प्रतिशत पुरुष कर्मचारी एक किलोमीटर या उससे अधिक दूरी तय कर काम पर जाते हैं, जबकि महिलाओं में यह आँकड़ा 41.9 प्रतिशत है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह अंतर और बड़ा है।

छात्रों का यात्रा खर्च

शिक्षण संस्थानों तक आने-जाने पर छात्रों का औसत मासिक खर्च ₹443 है। शहरी छात्र औसतन ₹617 प्रति माह खर्च करते हैं, जबकि ग्रामीण छात्रों का औसत खर्च ₹361 है। छह वर्ष और उससे अधिक उम्र के करीब दो-तिहाई छात्र अपनी मूल पाठ्यक्रम वाली संस्था तक एक किलोमीटर या उससे अधिक की यात्रा करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह हिस्सा 65.6 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 68.1 प्रतिशत है।

87.6 प्रतिशत छात्र 30 मिनट के भीतर शिक्षण संस्थान पहुँच जाते हैं। छात्रों की औसत यात्रा अवधि लगभग 23 मिनट है। देशभर में छात्रों की यात्रा में पैदल चलने की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत, बस की 29.5 प्रतिशत और साइकिल की 15.8 प्रतिशत है।

रात भर की यात्रा

परिवारों की रात भर की यात्राओं में बस और रेल की हिस्सेदारी बड़ी है। ऐसी यात्राओं में 55.8 प्रतिशत बस से और 17.7 प्रतिशत अंतर-शहरी रेल से होती हैं। इसके बाद कार की हिस्सेदारी 15.1 प्रतिशत और दोपहिया की 8.8 प्रतिशत है। ये यात्राएँ मुख्य रूप से सामाजिक और धार्मिक उद्देश्यों से जुड़ी हैं। शहरी परिवारों में रात भर की यात्रा के लिए रेल का उपयोग ग्रामीण परिवारों की तुलना में अधिक है।

सर्वे का दायरा

यह एनएसओ का पहला अखिल भारतीय घरेलू यात्रा सर्वेक्षण है। इसमें 14,274 गाँवों और 10,377 शहरी ब्लॉकों को शामिल किया गया। जानकारी 4,92,023 परिवारों से ली गई, जिनमें 20,34,371 व्यक्ति शामिल थे। सर्वे काम, शिक्षा और रात भर की घरेलू यात्रा के पैटर्न, खर्च, समय और साधनों पर आँकड़े देता है।

रवि कुमार यादव

गाँव और शहर दोनों की ज़िंदगी से जुड़े रहे हैं। परिवार में खेती-बाड़ी और मेहनत का माहौल रहा, जिससे उनमें जमीन से जुड़ाव बना। वे कम बोलते हैं, लेकिन ध्यान से सुनते हैं। यात्रा करना, स्थानीय मेलों में घूमना और पुराने दोस्तों से मिलना उनकी रुचि है। वे साधारण लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को सम्मान की नजर से देखते हैं।

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