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किसानों की बर्बाद फसल पर सरकार तत्काल मुआवजे का करे ऐलान : धनीराम।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ में चक्रवाती तूफान और बेमौसम बारिश से किसानों की फसलों को हुए नुकसान पर समाजवादी पार्टी ने गहरी चिंता जताई है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एवं बिलासपुर लोकसभा के पूर्व प्रत्याशी धनीराम यादव ने प्रदेश सरकार से किसानों के हित में तत्काल राहत पैकेज और मुआवजे की घोषणा करने की मांग की है।धनीराम यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ का किसान सालभर कड़ी मेहनत, खून-पसीना बहाकर अपनी फसल तैयार करता है। खेती के दौरान उसे मौसम की मार, कीट-पतंगों और अनेक प्राकृतिक चुनौतियों से जूझना पड़ता है। कर्ज लेकर और अपनी जमा पूंजी लगाकर किसान इस उम्मीद में खेती करता है कि फसल तैयार होने पर परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और सालभर की मेहनत का फल मिलेगा। लेकिन जब फसल कटाई के लिए पूरी तरह तैयार थी, तभी चक्रवाती तूफान और प्राकृतिक आपदा ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा ने अन्नदाताओं को आर्थिक संकट में डाल दिया है। किसानों के सामने अब कर्ज चुकाने, परिवार का भरण-पोषण करने और आगामी खेती की तैयारी करने की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। ऐसे कठिन समय में सरकार केवल नुकसान का आकलन कराने तक सीमित न रहे, बल्कि किसानों के साथ मजबूती से खड़ी होकर उन्हें तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए।धनीराम यादव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश सरकार को किसानों की पीड़ा समझते हुए प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल फसल क्षति का सर्वेक्षण कराना चाहिए तथा बिना किसी देरी के उचित मुआवजे की घोषणा करनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से मांग की कि कर्ज लेकर खेती करने वाले किसानों को प्राथमिकता के आधार पर राहत प्रदान की जाए, ताकि वे इस प्राकृतिक आपदा के आर्थिक दुष्प्रभाव से उबर सकें।उन्होंने आगे कहा कि त्योहारों के इस माहौल में प्रदेश के किसानों के चेहरे मायूसी से भरे हुए हैं। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसानों को राहत देकर उनके घरों में खुशियां लौटाने का प्रयास करे। अन्नदाता की मेहनत और उसके परिवार की खुशहाली से ही प्रदेश की समृद्धि जुड़ी हुई है।अंत में धनीराम यादव ने प्रदेश सरकार से विनम्र निवेदन करते हुए मांग की कि किसानों के दर्द को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना के आधार पर समझा जाए और तत्काल राहत एवं मुआवजे की घोषणा कर प्रभावित किसानों को इस संकट से उबारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

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