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विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची पुनरीक्षण पर आरोप तेज किए, 6 अक्टूबर को मुख्यालय पर मार्च का ऐलान

नई दिल्ली: विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मतदाता सूची के प्रबंधन को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार तथा भारत निर्वाचन आयोग पर हमला तेज कर दिया है। द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर 2026 की जांच रिपोर्ट के बाद कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और इंडिया गठबंधन के अन्य दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या हटाने, एसआईआर रोकने और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है। आयोग और भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों से इनकार किया है।

रिपोर्ट में क्या दावा किया गया

अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब दस महीनों में कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की। आपत्तियां नए मतदाताओं के पंजीकरण, फॉर्म-6 में बदलाव, नाम हटाने और बहाली, पश्चिम बंगाल में अपीलों तथा मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकरण और सुरक्षा से जुड़ी बताई गईं। रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ फैसले और आदेश उनकी जानकारी के बिना जारी हुए, और एक आपत्ति में कार्रवाई को अनधिकृत तथा गैरकानूनी बताया गया। गोवा में करीब 97 मतदाताओं का मामला भी उठाया गया, जिन्हें स्थानीय अधिकारियों ने पात्र माना, लेकिन केंद्रीय सॉफ्टवेयर में उन्हें अंतिम सूची में शामिल करने का विकल्प नहीं मिला।

आयोग ने रिपोर्ट के अस्तित्व से इनकार नहीं किया। उसने कहा कि लिखित नोट, सुझाव और अलग राय किसी संस्था की निर्णय-प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं, तथा पिछले एक वर्ष के आदेश, एसआईआर सहित, पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत फैसलों का परिणाम हैं। आयोग ने यह भी कहा कि उसके आदेश कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी होते हैं। 26 सितंबर को हुई बैठक में तीनों आयुक्त मौजूद रहे। आयोग ने स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र किसी प्रतिनियुक्ति अधिकारी से जुड़ा था, आयोग की नीति या आईटी प्रभाग से नहीं।

विपक्ष की मांगें और आरोप

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि वोट चोरी भारत के लोगों के खिलाफ अपराध और संविधान पर हमला है, तथा इसे अंजाम देने वालों ने देशद्रोह का काम किया है। उन्होंने एक वीडियो संदेश में चुनाव अधिकारियों से कहा कि जो हो रहा है वह गलत है और समय आने पर जवाबदेही तय होगी। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने ज्ञानेश कुमार को प्रक्रिया का मास्टरमाइंड बताया और गिरफ्तारी की मांग की। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गिरफ्तारी और एसआईआर से पहले की सूची पर नए चुनाव की बात कही।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि करीब 13.3 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए। मीडिया और विश्लेषकों के अनुमान भी देशभर में करीब 13 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूचियों से बाहर होने की बात करते हैं। विपक्ष का आरोप है कि हटाने की प्रक्रिया कमजोर वर्गों और विपक्षी मतदाताओं को असमानुपात रूप से प्रभावित करती है तथा भाजपा को लाभ पहुंचाती है। ये आरोप अब तक अदालत या स्वतंत्र जांच से साबित नहीं हुए हैं।

30 सितंबर को इंडिया गठबंधन की बैठक में 19 दलों ने फैसला किया कि 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसद चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करेंगे। 2 से 8 अक्टूबर तक जिलों में सेव डेमोक्रेसी कार्यक्रम और 1 नवंबर को दिल्ली में बड़ी रैली का भी ऐलान हुआ। खड़गे ने ईवीएम की जगह मतपत्र से मतदान और भविष्य के चुनावों में एसआईआर से पहले की सूची की मांग दोहराई। आम आदमी पार्टी ने कहा कि वह 6 अक्टूबर के संयुक्त मार्च में शामिल नहीं होगी और अपना अलग अभियान जारी रखेगी।

आयोग और भाजपा का पक्ष

निर्वाचन आयोग का कहना है कि एसआईआर का उद्देश्य मृतक, स्थानांतरित, डुप्लिकेट और अपात्र नाम हटाना है, क्योंकि पिछली व्यापक पुनरीक्षण करीब एक चौथाई सदी पहले हुई थी। सुप्रीम कोर्ट पहले इस प्रक्रिया की वैधता को बरकरार रख चुका है। भाजपा का कहना है कि हटाए गए नामों में बड़ी संख्या मृतक, अनुपस्थित और स्थानांतरित मतदाताओं की है, तथा विपक्ष चुनावी हार के बाद आयोग को निशाना बना रहा है। पार्टी ने आरोपों को आधारहीन बताया और कहा कि आयोग का स्पष्टीकरण विपक्ष के दावों को कमजोर करता है।

संसद में पहले भी विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का नोटिस दे चुका है, लेकिन आवश्यक बहुमत नहीं होने से प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ा। मामला अब राजनीतिक विरोध, आयोग के आंतरिक रिकॉर्ड और सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं के बीच चल रहा है।

कविता मिश्रा

घर-गृहस्थी के बीच पली-बढ़ीं। परिवार, रिश्ते और रोजमर्रा के काम उनकी जिंदगी का बड़ा हिस्सा रहे। उन्हें किचन में समय बिताना, त्योहारों की तैयारी और पड़ोसियों से बात करना अच्छा लगता है। वे चुपचाप देखती हैं और मन में बातें रखती हैं। उनकी सोच घर और आसपास के जीवन से निकली हुई है।

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