डॉक्टरों के भ्रामक विज्ञापनों को लेकर एनएमसी जारी किया गाइडलाइन

मुख्य सचिव, स्वास्थ्य सचिव को कार्रवाई के लिए भेजा
रायपुर, 8 अक्टूबर। नेशनल मेडिकल कमिशन ने डॉक्टरों द्वारा दिए जा रहे विज्ञापनों को लेकर एक गाइडलाइन जारी किया है। कमीशन ने इलाज को लेकर भ्रामकता पर रोक लगाने यह गाइडलाइन जारी करने की बात कही है।
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग नैतिकता और चिकित्सा पंजीकरण बोर्ड के सचिव डॉ. राघव लैंगर ने सभी राज्यों के मुख्य सचिव, स्वास्थ्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा , डीएमई राज्य चिकित्सा परिषदों के रजिस्ट्रार सभी मेडिकल कॉलेजों/संस्थानों के डीन/प्रधानाचार्य को यह भेजा है। इसे अस्पतालों/चिकित्सा संस्थानों और पंजीकृत चिकित्सा पेशेवरों द्वारा नैतिक विज्ञापन और सार्वजनिक संचार पर दिशानिर्देश कहा गया है। यह निर्देशसर्वोच्च न्यायालय में तीन वर्ष पूर्व दायर रिट याचिका (सिविल) के फैसले और इंडियन मेडिकल काउंसिल (पेशेवर आचरण, शिष्टाचार और नैतिकता) विनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत निम्नलिखित उद्देश्यों के साथ तैयार किए गए हैं।।सभी डाक्टरों से कहा गया है कि चिकित्सा पेशे की गरिमा बनाए रखने स्वास्थ्य सेवा के व्यावसायीकरण को रोकना।मरीजों के हितों की रक्षा करना और भ्रामक चिकित्सा दावों को रोकना।यह सुनिश्चित करना कि स्वास्थ्य सेवा संचार जानकारी पूर्ण, नैतिक और साक्ष्य-आधारित हो।
अस्पताल के विज्ञापन प्रथाओं को पंजीकृत चिकित्सा पेशेवरों पर लागू पेशेवर मानकों के अनुरूप बनाना।चिकित्सा देखभाल के व्यावसायीकरण को हतोत्साहित करते हुए पारदर्शिता को बढ़ावा देना और डिजिटल स्वास्थ्य सेवा प्रचार को विनियमित करना।चिकित्सा की सभी प्रणालियों आदि में नैतिक समानता सुनिश्चित करना।
तदनुसार, राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग सभी पंजीकृत चिकित्सा पेशेवरों और अन्य संबंधित हितधारकों को सूचित करता है कि वे संलग्न दिशानिर्देशों के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करें।
स्मरण पत्र कहा जा रहा
हालांकि इसे एक औपचारिक स्मरण पत्र (रिमाइंडर लेटर)ही कहा जा रहा है क्योंकि पूर्व में जारी
गाइडलाइन को लेकर न तो सरकार ने अब तक गंभीरता से कार्रवाई की न डाक्टर फ़ॉलो कर रहे ।



