छत्तीसगढ़

22 साल से संतान की आस, हाईकोर्ट ने 47 वर्षीय महिला को आईवीएफ की अनुमति दी

पति की उम्र 55 साल से ज्यादा होने पर अटका था इलाज

छत्तीसगढ़ संवाददाता

बिलासपुर, 8 अक्टूबर। करीब 22 साल से संतान की उम्मीद लगाए दंपती को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत मिली है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया कि पत्नी निर्धारित आयु सीमा में है और चिकित्सकीय रूप से आईवीएफ के लिए उपयुक्त है तो सिर्फ पति की अधिक उम्र के आधार पर इलाज से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने 47 वर्षीय महिला को आईवीएफ यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन उपचार की अनुमति दे दी है।

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के इस दंपती की शादी को करीब 22 साल हो चुके हैं और उनकी कोई जीवित संतान नहीं है। पत्नी ने 2013 में उपचार कराया था, लेकिन सफलता नहीं मिली। वर्ष 2015 में गर्भ ठहरा, पर करीब चार महीने बाद गर्भपात हो गया।

इसके बाद दंपती ने रायपुर के आयुष टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर में आईवीएफ उपचार के लिए संपर्क किया। चिकित्सकीय जांच के बाद सेंटर ने उन्हें उपचार के लिए उपयुक्त पाया। लेकिन पति की उम्र 57 साल होने के कारण अनुमति नहीं मिली।

दंपती ने 24 जून 2026 को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष आवेदन दिया था। 31 जुलाई को इसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 की धारा 21 के तहत महिलाओं के लिए 50 साल से कम और पुरुषों के लिए 55 साल से कम उम्र की सीमा निर्धारित है। कोर्ट ने कहा कि कानून में पति-पत्नी की संयुक्त उम्र के आधार पर दोनों को अयोग्य ठहराने का प्रावधान नहीं है।

कोर्ट ने पत्नी की उम्र और उसकी चिकित्सकीय उपयुक्तता को ध्यान में रखते हुए कहा कि पति की उम्र के कारण महिला की स्वतंत्र पात्रता खत्म नहीं हो जाती।

हाईकोर्ट ने अनुमति खारिज करने वाला आदेश रद्द कर दिया। साथ ही निर्देश दिया कि इलाज पत्नी की चिकित्सकीय उपयुक्तता और अन्य कानूनी, नैतिक तथा नियामकीय शर्तों के अनुसार किया जाए।

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